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आरोपी विदेशी नागरिक
Mumbai मुंबई। छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (CSMIA) पर मुंबई कस्टम विभाग की टीम ने आज एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बैंकॉक से आए एक विदेशी यात्री को हिरासत में लिया, जिसके पास से दो सिलवरी गिबन (Hylobates Moloch) पाए गए — जिनमें से एक जीवित था और दूसरा मृत अवस्था में मिला। यह दुर्लभ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित प्रजाति है, जो इंडोनेशिया के जावा द्वीप की मूल निवासी है। कस्टम विभाग के मुताबिक, यह कार्रवाई गोपनीय खुफिया सूचना के आधार पर की गई। जांच के दौरान विदेशी यात्री के चेक-इन बैगेज (ट्रॉली बैग) की तलाशी ली गई, जिसमें एक टोकरी में छिपाकर दो सिलवरी गिबन रखे गए थे। अधिकारियों ने तुरंत ही उन्हें जब्त कर लिया और संबंधित यात्री को गिरफ्तार कर लिया।
सिलवरी गिबन एक छोटी बंदर प्रजाति है, जिसे उसकी चांदी जैसी नीली-धूसर फर और तेज आवाज़ वाले स्वर के लिए जाना जाता है। यह IUCN रेड लिस्ट में "Endangered (अति संकटग्रस्त)" श्रेणी में शामिल है। इनका अवैध व्यापार अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क का हिस्सा माना जाता है। जांच में पता चला है कि आरोपी विदेशी नागरिक पहले मलेशिया से थाईलैंड गया था, और वहीं से उसे सिंडिकेट के एक सदस्य द्वारा यह बैग सौंपा गया, जिसे उसे भारत में डिलीवर करना था। सिंडिकेट ने ही उसकी यात्रा योजना और टिकट की व्यवस्था की थी। अधिकारियों को संदेह है कि यह गिरोह एशिया से दुर्लभ जीवों की स्मगलिंग (तस्करी) के एक बड़े नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।
मुंबई कस्टम की वन्यजीव अपराध शाखा ने तुरंत ही भारतीय वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत जांच शुरू कर दी है। इस मामले की जांच कस्टम अधिनियम, 1962 और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जीवित गिबन को फिलहाल वन्यजीव बचाव केंद्र भेजा गया है, जहां उसकी चिकित्सीय जांच और देखभाल की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी केवल एक “कूरियर” के रूप में काम कर रहा था, जिसे अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह द्वारा पैसे के लालच में इस्तेमाल किया गया। यह गिरोह दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों — मलेशिया, इंडोनेशिया, और थाईलैंड — से दुर्लभ और लुप्तप्राय वन्यजीवों को भारत और पश्चिमी देशों में बेचने की कोशिश करता है।
मुंबई कस्टम विभाग ने इस कार्रवाई को वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ी सफलता बताया है। विभाग का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह के अपराधों से निपटने के लिए भारतीय एजेंसियों को अब अधिक सतर्कता और समन्वय की आवश्यकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सिलवरी गिबन की जनसंख्या पिछले दशकों में तेजी से घटी है। अवैध पालतू व्यापार और जंगलों के विनाश के कारण यह प्रजाति अब विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी है।
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